टांडा से डॉ. यत्न जैन का तबादला, आदिवासी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, स्वास्थ व्यवस्था पर पड़ेगा असर….
फ़ास्ट न्यूज़ जनता की आवाज़ टांडा से प्रियेश ठाकुर की रिपोर्ट

टांडा से डॉ. यत्न जैन का तबादला, आदिवासी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, स्वास्थ व्यवस्था पर पड़ेगा असर….

रिंगनोद में पहले से तीन डॉक्टर पदस्थ, टांडा में आपातकालीन सेवाओं को लेकर बढ़ी चिंता; पहले भी जनहित में रुका था स्थानांतरण
टांडा, धार।
आदिवासी बहुल टांडा क्षेत्र के शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. यत्न जैन का स्थानांतरण रिंगनोद किए जाने के बाद क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि टांडा जैसे दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र में अनुभवी चिकित्सक की उपलब्धता बेहद जरूरी है। ऐसे में डॉ. जैन का स्थानांतरण जनहित की दृष्टि से पुनर्विचार योग्य है।
टांडा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन सड़क दुर्घटनाओं, कीटनाशक सेवन, चोट लगने, टांके लगाने, प्लास्टर चढ़ाने सहित कई तरह की आपातकालीन चिकित्सा परिस्थितियां सामने आती रहती हैं। ऐसे समय में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्थानीय स्तर पर डॉ. यत्न जैन इन परिस्थितियों में मरीजों को संभालने और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
पहले भी जनहित में रोका गया था स्थानांतरण
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व भी डॉ. यत्न जैन का स्थानांतरण किया गया था। उस समय टांडा क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और आमजन को होने वाली संभावित परेशानियों को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर महोदय से निवेदन किया था। जनहित एवं क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उस समय उनके स्थानांतरण पर रोक लगाई गई थी।
अब एक बार फिर डॉ. जैन का स्थानांतरण रिंगनोद किए जाने से क्षेत्रवासियों में चिंता है। नागरिकों का कहना है कि जब पहले भी टांडा में उनकी आवश्यकता को देखते हुए स्थानांतरण पर रोक लगाई गई थी, तो वर्तमान निर्णय में भी क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और आमजन की परेशानियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
रिंगनोद में तीन डॉक्टर, फिर टांडा से स्थानांतरण क्यों?
स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिंगनोद में पहले से ही तीन चिकित्सक पदस्थ हैं। वहीं, डॉ. यत्न जैन के स्थानांतरण के बाद टांडा स्वास्थ्य केंद्र में दो नए चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है, जो सरकारी बॉन्ड के अंतर्गत कार्यरत बताए जा रहे हैं। उनकी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से संबंधित अधिकृत जिम्मेदारियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि टांडा की भौगोलिक परिस्थितियों, आदिवासी आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को देखते हुए यहां अनुभवी चिकित्सक का रहना अत्यंत आवश्यक है। आपातकालीन स्थिति में मरीज को समय पर उपचार मिलना कई बार उसके जीवन की रक्षा के लिए निर्णायक साबित होता है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र में अनुभवी चिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
आदिवासी क्षेत्र के मरीजों के हित में हो निर्णय
टांडा एवं आसपास के गांवों के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए डॉ. यत्न जैन की टांडा में पुनः पदस्थापना की मांग उठाई जा रही है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि प्रशासन को केवल स्थानांतरण की प्रक्रिया तक सीमित न रहकर क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों, आपातकालीन मरीजों की स्थिति और चिकित्सकों की उपलब्धता का भी आकलन करना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि डॉ. यत्न जैन का स्थानांतरण निरस्त कर उन्हें टांडा स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी रूप से पदस्थ किया जाए, ताकि आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रभावित न हों।
अब देखना यह होगा कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग और शासन क्या कदम उठाते हैं तथा टांडा क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए क्या निर्णय लिया जाता है।
फ़ास्ट न्यूज़ जनता की आवाज़ टांडा से प्रियेश ठाकुर की रिपोर्ट




